Search for products..

Home / Categories / SPICES (गरम मसाले) /

काली मिर्च BLACK PEPPER (गोल मिर्च साबुत)

काली मिर्च BLACK PEPPER (गोल मिर्च साबुत)



badge
badge
badge

Product details

भारत में ऐसा कोई घर नहीं होगा जहाँ काली मरिच का प्रयोग नहीं होता हो। यह मसालों (Spice) की रानी मानी जाती है। चाहे हम कोई भी सब्जी बनाएं। सब्जी सूखी हो या रसेदार या फिर नमकीन से लेकर सूप आदि तक, हरेक व्यंजन में काली मरिच का प्रयोग जरूर होता है। काली मरिच के काफी अधिक औषधीय लाभ हैं। यह वात और कफ को नष्ट करती है और कफ तथा वायु को निकालती है। यह भूख बढ़ाती है, भोजन को पचाती है, लीवर को स्वस्थत बनाती है और दर्द तथा पेट के कीड़ों को खत्म करती है। यह पेशाब बढ़ाती है और दमे को नष्ट करती है। तीखा और गरम होने के कारण यह मुँह में लार पैदा करती है और शरीर के समस्त स्रोतों से मलों को बाहर निकाल कर स्रोतों को शुद्ध करती है। इसे प्रमाथी द्रव्यों में प्रधान माना गया है। .काली मरिच के 2 ग्राम चूर्ण को गर्म दूध तथा मिश्री के साथ पी लेने अथवा इसके 7 दाने निगलने से जुकाम तथा खाँसी में लाभ होता है। आँखों की रौशनी बढ़ाने के लिए रोजाना सुबह आधा से 1 ग्राम तक काली-मरिच में 1 चम्मच घी तथा आवश्यकतानुसार मिश्री मिलाकर चाटें। बाद में दूध पीएं। आँखों की पलकों पर अगर फुंसी हो जाए तो काली मरिच को पानी में घिसकर लेप करने से फुंसी पककर फूट जाती है। 2-3 ग्राम काली मरिच चूर्ण को शहद और घी (असमान मात्रा में) में मिला लें। इसे सुबह-शाम चाटने से सर्दी, सामान्य खाँसी, दमा और सीने का दर्द मिटता है। इससे फेफड़ों में जमा कफ निकल जाता है। 200 मिली गाय के दूध में 2 ग्राम काली मरिच चूर्ण को पकाकर पिलाने से दमा-खाँसी में लाभ होता है। यदि खाँसी बार-बार उठती हो, भोजन निगलने में कष्ट हो तो दिन में 2-3 बार काली मिर्च के हल्के काढ़े से कुल्ला करें। .कमजोरी आलस्य, उदासीनता आदि दूर करने के लिए काली मरिच (Marich Herb) के 4-5 दाने, सोंठ, दालचीनी, लौंग और इलायची थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिला लें। इसे चाय की तरह उबाल लें। इसमें दूध और शक्कर मिलाकर पीने से लाभ होता है।


Similar products


Home

Cart

Account